Dhary Rakhne Ka Mahtav | बुरे समय में धैर्य रखने का महत्व क्या है – Mahatma Gautam Buddha

Dhary Rakhne Ka Mahtav | बुरे समय में धैर्य रखने का महत्व क्या है – Mahatma Gautam Buddha

टूटे हुए सपनो को सिर्फ उम्मीद से जोड़ा जा सकता है धैर्य रख मेरे दोस्त,
क्योकि धैर्य से हर मुसीबत के पहाड़ को तोडा जा सकता है ।

Dhary Rakhne Ka Mahtav
Dhary Rakhne Ka Mahtav

Dhary Rakhne Ka Mahtav: दोस्तों आजकी हमारी ये कहानी महात्मा गौतम बुद्ध के जीवन से ली गई है जो आज आपको सिखाएगी की जिंदगी के अंदर से दुःख को दूर करने के लिए धैर्य रखना कितना जरुरी है।

दोस्तों बुरा समय एक ऐसी स्थिति है जो किसी के भी जीवन में दस्तक दे सकता है। बुरा समय आने पर हम क्या करे। इस तरह के कई परशन हमारे मन में होते है। लेकिन उनका स्टिक उत्तर नहीं मिल पाता। हमारी इस परेसानी का हल महात्मा बुद्ध के एक प्रसंग में पाया गया है।

अगर आप भी बुरे समय से परेशान है तो इस कहानी को अंत तक देखे क्योकि इस कहानी में आपको बुरे समय से निकलने सही रास्ता मिल जायेगा। ये प्रसंग महात्मा बुद्ध का है जब महात्मा बुद्ध पुरे भारत में भर्मण कर रहे थे। और बौद्ध धर्म की शिक्षाओं का प्रचार कर रहे थे।

एक बार भगवान् गौतम बुद्ध अपने शिष्यों के साथ किसी जंगल से गुजर रहे थे। काफी देर तक भर्मण करने के कारन महात्मा बुद्ध का गला सूख गया। और उन्हें प्यास लगने लगी। प्यास के बढ़ने पर उन्होंने अपने एक शिष्य को पास के गांव से पानी लाने को कहा।

गुरु की आज्ञा पर वह शिष्य पानी लेने के लिए पास के गांव में चला गया। वह पहुंचने पर उसे पता चला की गांव में एक छोटी सी नदी है और वह नदी गांव का एक मात्र जलस्त्रोत है। जब वह शिष्य उस नदी के पास पंहुचा तो उसने देखा की बहुत सारे लोग नदी में सनान कर रहे है।

कुछ लोग अपने गंदे कपडे धो रहे है तो कुछ लोग अपने पशुओ को नहला रहे है।  जिसके कारण नदी का पानी काफी गन्दा हो चूका था। शिष्य ने नदी का पानी देखकर सोचा की गुरूजी के लिए यह पानी ले जाना उचित नहीं होगा।

और वहा बिना पानी ही लिए लोट गया। शिष्य को बिना पानी लाते हुए देखकर महात्मा बुद्ध ने अपने दूसरे शिष्य को उसी नदी से पानी लाने के लिए कहा। कुछ समय बाद वह दूसरा शिष्य पानी लेकर आ गया। ये देखकर पहला शिष्य आश्चर्य चकित हो गया।

उसने पूछा की गांव की नदी का पानी तो बहुत गन्दा था। तो फिर तुम ये पानी कहा से लाये। सवाल का जवाब देते हुए शिष्य बोलै जब मै वहा पंहुचा तो नदी का पानी वाकई गन्दा था। लेकिन जब सब अपना काम करके वहा से चले गए तो मैंने विचार किया।

और मै वहा बैठ गया कुछ देर में पानी में मिली मिटटी नदी के तल में जाकर बैठ गई। और पानी फिर से साफ़ हो गया वही साफ़ पानी मै मटके में भरकर ले आया। अपने शिष्य का उत्तर सुनकर महात्मा बुद्ध बेहद परसन हुए। और बाकि शिष्यों को शिक्षा देते हुए बोले।

जब हमारे जीवन में दुःख, दर्द और बुरा समय आता है तो हमारा जीवन भी उस जल की भांति गन्दा नजर आता है। लेकिन हम उस बुरे समय से हार मान कर बैठ जाते है। लेकिन हमें ऐसा नहीं करना चाहिए बल्कि धैर्य रखकर शांति से परिस्थिति का आंकलन करना चाहिए।

और सही निर्णय लेकर पुरे आत्मविश्वास के साथ उस पर अमल करना चाहिए। क्योकि धैर्य, शांत मन, निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास हो तो बुरे से बुरे समय को हराकर आगे बढ़ा जा सकता है। जिस तरह उस शिष्य ने गंदे जल के अंदर से अपना धैर्य रखकर उस साफ़ पानी को पा लिया।

बिलकुल उसी तरह हम भी जीवन की सारी गंदगी और सारे दुःख सारी परेशानियों से निपटकर बेहतर सुखी जीवन पा सकते है। बस जरुरत है तो इन चार बातों को अपनाने की। हां तो दोस्तों महात्मा बुद्ध ने बहुत ही आसान शब्दों में समझाया है की धैर्य रखकर बड़े से बड़े पहाड़ को भी तोडा जा सकता है।

फिर मिलेंगे दोस्तों एक और नई कहानी के साथ तब तक अपना ख्याल रखे और हमेशा मुस्कुराते रहिये। आज की हमारी ये कहानी कैसी लगी कमेंट बॉक्स में जरूर लिखना।

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