Buddha Motivational Story In Hindi | एक भिक्षु ने बुद्ध से पूछा की बुद्ध आपको ध्यान करने से क्या मिला |

एक भिक्षु ने बुद्ध से पूछा की बुद्ध आपको ध्यान करने से क्या मिला

Buddha Motivational Story In Hindi: एक बार एक भिक्षु बुद्ध से पूछता है की बुद्ध आपको ध्यान करने से क्या मिला बुद्ध अपने भिक्षु की बात सुनकर मुस्कुराते है और कहते है की कुछ नहीं। बुद्ध की बात सुनकर सभी भिक्षु आश्चर्य चकित रह जाते है। और सोचते है की हमने अपना घर बार सबकुछ छोड़ दिया।

Buddha Motivational Story In Hindi
Buddha Motivational Story In Hindi

उस परम आनंद को पाने के लिए। पर बुद्ध ऐसा क्यों कह रहे है। उन्हें ध्यान से कुछ भी नहीं मिला।  हमें बताना नहीं चाहते। बुद्ध अपने सभी भिक्षुओ से कहते है की तुम्हारे मन की उलझन एकदम सही है। पर मै तुम्हे बताना चाहता हूँ की मैंने ध्यान से सच में कुछ नहीं पाया।

बुद्ध का जवाब सुनकर सब लोगो के मन में एक निराशा सी छा जाती है सब लोग सोचते है की हमारा उदेश्य तो परम आनंद को पाने का था। लेकिन बुद्ध कह रहे है की ध्यान से हमें कुछ भी नहीं मिलता। बुद्ध कहते है की मैंने ध्यान से कुछ पाया तो नहीं।

पर खोया बहुत कुछ है। बुद्ध की ये बात सुनकर बुद्ध के भिक्षुक और भी ज्यादा आश्चर्य चकित हो जाते है। बुद्ध कहते है की मैंने क्रोध खोया, उदासी को खोया, चिंता को खोया, असुरक्षा की भावना को खोया और मृत्यु के डर पर विजय पाई।

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बुद्ध की इस बात को सुनकर सभी लोगो के मन में एक ख़ुशी की लहर दौड़ पड़ती है। बुद्ध कहते है की ध्यान का लक्ष्य कुछ पाना नहीं है बल्कि उन सभी बुरी परवर्तियों को खो देना है। जिनके कारण अभी भी तुम परम सत्य से दूर हो।

बुद्ध की बात सुनकर बुद्ध के सभी भिक्षु बहुत खुश होते है। बुद्ध के सभी भिक्षुओ में से एक भिक्षु बुद्ध से प्रशन करता है। बुध्द से पूछता है की बुद्ध क्या कोई ऐसा कोई तरिकका है जिससे हम सांसारिक जीवन में आनंदमय रह सके।

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क्योकि हम सभी लोग तो आपके भिक्षु है पर उन्हें खुश और शांत रहने का अधिकार नहीं जो सांसारिक जीवन व्यतीत करते है। बुद्ध मुस्कुराते है और कहते है प्रिय भिक्षु मै अच्छे आचरण को ही सबसे उच्च मानता हूँ। अगर जंगल  जाये तो वह आग अपनी तीव्रता अपनी उग्रता को बढ़ाने के लिए अपने मार्ग में आने वाले सभी पेड़ पोधो को जला देती है।

जितना ज्यादा ईंधन वह कहती है उतनी ही तीव्रता उसकी बढ़ती जाती है। उसी प्रकार दुष्ट परवर्ती जैसे की क्रोध, चिंता, लोभ और भय तब तक ही बलवान रहते है जब तक हम उन्हें ईंधन देते है। जब हम उन्हें ईंधन देना बंद कर देते है तो उनका बल ख़त्म होने लगता है।

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यदि किसी व्यक्ति का सारा ध्यान बहरी चीज़े इकठ्ठा करने में है। तो वह इंसान कभी भी खुश नहीं रह सकता। क्योकि जब तक वह उस चीज को पा नहीं लेता जिसको व पाना चाहता है तब तक वह उसकी चिंता में दुखी रहेगा।

और जब वह उस चीज़ को पा लेगा जिस चीज को वह पाना चाहता था तो उसके बाद वो इस बात को सोच सोच कर दुखी रहेगा की इसको मुझसे कोई छीन ना ले। इसलिए दुःख दोनों ही स्थितियों में उसको मिलेगा। बुद्ध का भिक्षुक पूछता है क्या इसका कोई उपाय है।

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बुद्ध कहते है अगर कोई व्यक्ति इन बेड़िओ को ही काट दे तो ना तो उसके आने वाले कल की चिंता रहेगी और ना ही बीते हुए कल का बोझ। बुद्ध का भिक्षुक बुद्ध से पूछता है बुद्ध ये बेड़िया क्या है। बुध्द कहते है ये बेड़िया तुम्हारी नासमझी है।

मनुष्य दुखी इसीलिए होता है की वह चीज़ो से अपने आप को जोड़ लेता है। यदि वह पूरी सप्ष्टा के साथ वह देख ले की कोई भी चीज चाहकर भी उससे नहीं जुड़ सकती तो वह इन बेड़ियों को काट सकता है। हम सब सोचते है की ये मेरा है, वो मेरा है पर वास्तव में कुछ भी हमारा नहीं है।

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यहाँ तक की ये शरीर भी हमारा नहीं है। जितना तुम असत्य में जिओगे उतना तुम इन बेड़ियों को मजबूत करोगे। और जितना तुम वास्तविकता को देखोगे, सत्य को देखोगे उतना ही तुम इन बेड़ियों को काटते जाओगे। निर्णय तुम्हारे हाथ में है।

इस कहानी में बड़े ही सरल शब्दों में बुद्ध ने इस बात को समझाने का प्रयास किया है की ध्यान में कुछ भी पाना हमारा लक्ष्य नहीं है अगर हम उस हर बुरी परवर्ती को अपने आप से अलग कर देते है तो जो बचेगा वही परमानन्द है।

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जिसके लिए हमें कुछ इकट्ठा करने की जरुरत नहीं है। वह तो पहले से ही विद्यमान है। दूसरा बहुत सारे लोग ये पूछते है की हम बुद्ध के मार्ग पर कैसे चले। बुद्ध ने बड़े स्पष्ट शब्दों में कहा है की वो अच्छे आचरण को ही सर्वोच्य मानते है।

अगर आप अपने जीवन में अच्छा आचरण ला सकते है तो आप भगवान् गौतम बुद्ध के मार्ग पर है। जिसको आपको खोजने की जरुरत नहीं है।

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फिर मिलेंगे दोस्तों एक और नई कहानी के साथ तब तक अपना ख्याल रखे और हमेशा मुस्कुराते रहिये। आज की हमारी ये कहानी कैसी लगी कमेंट बॉक्स में जरूर लिखना।

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