मन को शांत कैसे करे? गौतम बुद्ध की एक प्रेरणादायक कहानी

मन को शांत कैसे करे? गौतम बुद्ध की एक प्रेरणादायक कहानी

दोस्तों एक बहुत समय पहले की बात है की एक गरीब इंसान अपनी गरीबी से बहुत ही परेशान हो गया था। जिससे उसके परिवार का गुजारा करना भी मुश्किल हो गया था। एक पत्नी और दो पुत्रो के भरण पोषण के बोझ ने उसके मन में उथल पुथल मचा दी थी। इसी उथल पूछल के चलते उसने घर छोड़कर भाग जाने का निर्णय ले लिया।

मन को शांत कैसे करे? गौतम बुद्ध की एक प्रेरणादायक कहानी
मन को शांत कैसे करे? गौतम बुद्ध की एक प्रेरणादायक कहानी 

और एक रात वो चुपचाप अपना घर परिवार छोड़कर चला गया। वो रात के समय में बिना कोई मंजिल को निर्धारित किये हुवे चला जा रहा था। जब वह एक नदी के किनारे पंहुचा तो उसने देखा की भगवान् बुद्ध अपने शिष्यों के साथ डेरा डाले हुए बैठे है। ये देखकर उसने निर्णय लिया की वो अब सन्याशी हो जायेगा। और भगवान् बुद्ध का शिष्य बनकर उनके साथ ही रहेगा।

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ये निर्णय लेकर वो भगवान् बुद्ध के चरणों में जाकर गिर गया। और उनसे विनती करने लगा की हे भगवन आप मुझे अपना शिष्य बना लो। भगवान् बुद्ध ने उस गरीब इंसान पर कृपा करके उसको अपना शिष्य बना लिया। और उसके बाद जब भगवान् बुद्ध का काफिला आगे बढ़ा तो वो भी उनके साथ चल पड़ा।

गर्मी का महीना था और भगवान् बुद्ध का काफिला चलता चला जा रहा था। जब वो एक जंगल में पहुचें तो सभी लोग एक पेड़ के निचे विश्राम करने के लिए रुक गए। गर्मी के कारण भगवान् बुद्ध को काफी जोरो की प्यास लगी थी। भगवान् बुद्ध ने अपने नए शिष्य से कहा की यहाँ पास में नदी है तुम वहा जाकर मेरे लिए पानी ले आओ।

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भगवान् बुद्ध का आदेश सुनकर वो नदी से पानी लेने चल पड़ा जब वह नदी के पास पंहुचा तो उसने देखा की कुछ जंगली जानवर नदी में उधम मचा रहे थे। परन्तु जब वो सरोवर के पास पंहुचा। तो सभी जानवर डर कर भाग गए। उस शिष्य ने नदी के पास जाकर देखा की नदी का पानी जानवरो के उधम मचाने से गन्दा हो गया है।

नदी का गन्दा पानी देखकर वो शिष्य बिना पानी लिए ही वापिस आ गया और आकर भगवान् बुद्ध से बोला हे भगवन उस नदी में तो बहुत ही गन्दा पानी था उसको तो पिया ही नहीं जा सकता। शिष्य की बात सुनकर भगवान् बुद्ध कुछ देर तक शांत रहे और फिर उसको कहा की जाओ और उसी नदी से पानी ले आओ।

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भगवान् बुद्ध का आदेश सुनकर वो शिष्य पानी ले तो चल पड़ा परन्तु मन में यही सोचता जा रहा था की भगवान् बुद्ध इतने गंदे पानी को पिएंगे कैसे। जब वह चलता हुआ नदी के पास पंहुचा तो ये देखकर चकित रह जाता है की नदी का पानी निर्मल और सवच्छ हो गया था। वह पानी लेकर भगवान् बुद्ध के पास आता है और ये प्रशन करता है की थोड़ी ही देर में नदी का पानी इतना साफ़ कैसे हो गया।

तब भगवान् बुद्ध ने उसको समझाते हुए कहा की जब जानवर पानी में उधम मचा रहे थे तो तब उसका कीचड़ उभर आया था लेकिन कुछ देर पानी के शांत रहने पर कीचड़ निचे बैठ गया। और पानी फिर से साफ़ हो गया। इसी प्रकार हमारे मन की भी स्तिथि होती है। जीवन की भागदौड़ और कठिनाइया जीवन में उथल पुथल मचा देती है।

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और उसके बाद हम गलत निर्णय ले लेते है। परन्तु कोई भी निर्णय लेने से पहले हम अपने मन को शांत रखे और धीरजपूर्वक सोचे तो हमारे मन की उथल पुथल भी उस पानी की तरह निचे बैठ जाएगी और तब हम जो निर्णय लेते है वो हमेशा ही सही होता है।

इसलिए बुरे समय में इंसान को कभी भी धीरज नहीं खोना चाहिए। भगवान् बुद्ध का ये उपदेश उसको शिष्य को समझ में आ जाता है। और जब वो शांति से बैठकर सोचता है तो उसको ये आभास हो जाता है की उसने घर छोड़कर जो निर्णय लिया था वो गलत था।

और वो भगवान् बुद्ध से आज्ञा लेकर अपने घर वापिस चला जाता है। तो दोस्तों कैसी लगी आपको आजकी हमारी ये कहानी हमें कमेंट बॉक्स में लिखकर जरूर भेजिएगा। और हमारे इस चैनल को सब्सक्राइब जरूर करे। 

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