क्या हम सब को स्वार्थी होना चाहिए? स्वार्थ सही होता है या गलत? Mind Fresh In Hindi

क्या हम सब को स्वार्थी होना चाहिए? स्वार्थ सही होता है या गलत? Mind Fresh In Hindi

हेलो दोस्तों कैसे हो आप सब उम्मीद करते है कि सब खुश होंगे। चाहे तरिकका कोई भी हो आप तक ख़ुशी पहुचनी चाहिए। और यही मेरा उदेश्य है गौतम बुद्ध का जीवन या फिर किसी भी ऐसे व्यक्ति का जीवन जो हमें प्रेरणा देता है। हम जितनी बार भी उनको जानने की कोशिश करते है या फिर समझने की कोशिश करते है। तो हर बार हमें कुछ नया सिखने को मिलता है।

क्या हम सब को स्वार्थी होना चाहिए? स्वार्थ सही होता है या गलत
क्या हम सब को स्वार्थी होना चाहिए? स्वार्थ सही होता है या गलत

आज उनके ही जीवन से एक बहुत बड़ी सीख, एक बहुत बड़ा सन्देश हम इस कहानी के द्वारा आप सब लोगो को बताना चाहता हूँ। आपने बहुत बार सुना होगा की हमको बिलकुल भी स्वार्थी नहीं होना चाहिए। हमें केवल अपने ही बारे में नहीं सोचना चाहिए। बल्कि दुसरो के बारे में भी सोचना चाहिए। ये बात एकदम सही है परन्तु शुरूआती सत्तर पर नहीं। ये बात एक जगह पर गलत भी साबित भी होती है।

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दोस्तों ऐसा हम क्यों कह रहे है इसका उदाहरण हम गौतम बुद्ध के जीवन से ही देंगे। यदि आप इस को स्पष्टता से देखेंगे तो आपको पता चल जायेगा की गौतम बुद्ध जैसा स्वार्थी व्यक्ति कोई नहीं था। और दूसरे ही क्षण में ये पाएंगे की गौतम बुद्ध से बड़ा निस्वार्थी भी कोई नहीं था।

जब सिद्धार्थ अपने पुरे परिवार और अपने पुरे राज्य को छोड़कर चले जाते है तो क्या लगता है आपको इस घटना से की वहां पर सिद्धार्थ गौतम बुद्ध ने अपना स्वार्थ नहीं दिखाया, क्या सिद्धार्थ ने उस समय केवल अपने बारे में नहीं सोचा। किसको पता था की सिद्धार्थ सत्य प्राप्त कर ही लेंगे। कोई नहीं जानता था। सब चाहते थे की उनका होने वाला राजा उनके पास ही रहे।

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उनकी माता चाहती थी की उनका पुत्र उनके पास रहे, उनके पिता भी यही चाहते थे की उनका पुत्र उनके पास रहे। उन्हें कोई भी मतलब नहीं था किसी भी सत्य से और होने वाली किसी भी घटना से जो भविष्य में होने वाली थी। परन्तु सिद्धार्थ अपने स्वार्थ के लिए सभी को छोड़कर चले गए। सिदार्थ को स्वार्थी माना जाता है लेकिन वो भी तब तक जब तक वो सत्य की खोज नहीं कर लेते है।

परन्तु जब वो सत्य की खोज कर लेते है तो उनसे बड़ा निस्वार्थी व्यक्ति भी कोई नहीं होता। और वो अपना पूरा जीवन लोगो की भलाई के लिए अर्पित कर देते है गौतम बुद्ध द्वारा कहीं गई बातें आज भी अंदर तक हिला देती है। अब चाहे इसको त्याग कहे या फिर स्वार्थ कहे पर जो भी कुछ था वो था बहुत बड़ा।

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क्योकि यदि सिद्धार्ध इस त्याग इस स्वार्थ को नहीं दिखाते तो संसार एक महान व्यक्ति से वंचित रह जाती। इस कहानी के माध्यम से मै सिर्फ आपको इतना ही कहना चाहता हूँ की कहीं कहीं पर स्वार्थी बनना भी बहुत ही जरुरी होता है। हर जगह निस्वार्थ से बात नहीं बनती। तो अगर आप जानते है की आपका स्वार्थ आने वाले समय के लिए आपके लिए अच्छा है और आपके परिवार और पास में रहने वालो के लिए अच्छा है तो आपको स्वार्थी बनना चाहिए।

लेकिन अगर आपका स्वार्थ के आपके लिए ही अच्छा है तो वो आपका स्वार्थ गलत है। आशा करता हूँ की इस कहानी से आपको एक बहुत ही अच्छा सीख मिली होगी। और आप स्वार्थ का मतलब समझ गए होंगे। और इसको अपने जीवन के अंदर लाएंगे और अपने जीवन को बेहतर बनाएंगे। 

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