क्या बिना भिक्षु बने परम सत्य को जान सकते है – महात्मा गौतम बुद्ध

क्या बिना भिक्षु बने परम सत्य को जान सकते है – महात्मा गौतम बुद्ध

एक बार कुछ बौद्ध भिक्षु एक गांव से गुजर रहे होते है। उस गांव के कुछ लोग उन बौद्ध भिक्षु को देखकर उनके पास जाते है। और उनसे कहते है महात्मा जी कृपा करके इस वृक्ष के निचे बैठ कर विश्राम करे। उस गांव में एक बहुत बड़ा बरगद का पेड़ था।

क्या बिना भिक्षु बने परम सत्य को जान सकते है - महात्मा गौतम बुद्ध
क्या बिना भिक्षु बने परम सत्य को जान सकते है – महात्मा गौतम बुद्ध

वे बौद्ध भिक्षु उस बरगद के पेड़ के निचे बैठ जाते है। उन बौद्ध भिक्षुओ के चेहरे पर एक अलग सी मुस्कराहट रहती है। जिसे देखकर उन गांव वालों के मन में जिज्ञासा पैदा होती है। वे गांव वाले उन बौद्ध भिक्षु से पूछते है। आपके  चेहरे पर ये जो पर्सनता झलक रही है।

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इसका क्या कारण है क्या आपने भी बुद्ध की तरह परम सत्य को जान लिया है। वे बौद्ध भिक्षु कहते है। नहीं मैं अभी उस मार्ग पर हूँ। वे गांव वाले उन बौद्ध भिक्षु से पूछते है। फिर आप इतने पर्सन और आनंदित कैसे दिख रहे है। वे बौद्ध भिक्षु उन गांव वालो से कहते है।

क्योकि मैं महात्मा बुद्ध का अनुयाई हूँ। और परम सत्य मुझसे ज्यादा दूर नहीं है। बुद्ध ने कहा है की परम सत्य हमारे भीतर है। उसे कही बाहर खोजने की जरुरत नहीं है। इसलिए मैं पर्सन हूँ। उन बौद्ध भिक्षु की बात सुन वे गांव वाले  उन बौद्ध भिक्षु से पूछते है।

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महात्मा जी आप तो बुद्ध के अनुयाई है। आपने अपना सबकुछ छोड़कर सत्य को अपना परम लक्ष्य बना लिया है। आप धन, सुख ऐश्वर्य इन सब से परे है। आपके जीवन में दुःख नहीं है। क्योकि आपने सबकुछ त्याग दिया है। लेकिन हम अपने आप को दुखी होने से कैसे बचाये।

क्योकि ना तो हम अपने परिवार को छोड़ सकते है और ना ही हम भिक्षु बन सकते है। तो क्या हमारे भाग्य में ख़ुशी नहीं है। वे बौद्ध भिक्षु कहते है की तुम भी अपने जीवन में ला सकते हो। वे गांव के लोग उन बौद्ध भिक्षु से पूछते है परन्तु कैसे।

आपका विश्वास ही आपका भाग्य निर्धारित करता है। – गौतम बुद्ध

वे बौद्ध भिक्षु कहते है सही आचरण अपनाकर। वे गांव वाले उन बौद्ध भिक्षु से पूछते है की ये सही आचरण क्या है। वे बौद्ध भिक्षु कहते है अपने बारे में भला सोचना किसी दूसरे के बारे में बुरा सोचे बगैर। प्रशन्ता को चुनना क्रोध को चुनने की बजाय किसी दूसरे से उम्मीद रखने की बजाय अपने ऊपर विश्वास करना।

ईमानदार होना, अपनी खुद की नजरो में एक बेहतर इंसान बनना। दुसरो को बदलने की बजाय खुद को बदलने का प्रयास करना। ये सभी एक अच्छे आचरण के स्तम्भ है।

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फिर मिलेंगे दोस्तों एक और नई कहानी के साथ तब तक अपना ख्याल रखे और हमेशा मुस्कुराते रहिये। आज की हमारी ये कहानी कैसी लगी कमेंट बॉक्स में जरूर लिखना।

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