आपका विश्वास ही आपका भाग्य निर्धारित करता है।

आपका विश्वास ही आपका भाग्य निर्धारित करता है।

आपने लोगों को कई बार ये कहते हुए सुना होगा की मुझे क्रोध बहुत आता है। मुझसे वो काम नहीं हो पायेगा। मेरे जीवन में बहुत ज्यादा दुःख है। मै आपसे पूछना चाहता हूँ की आप भी इस तरह के वाक्यों का इस्तेमाल करते है। जाने अनजाने में लोगो ने बहुत सारी मान्यताये बना रखी है। जो लोगो के जीवन को बिगाड़ती या बनाती है।

आपका विश्वास ही आपका भाग्य निर्धारित करता है।
आपका विश्वास ही आपका भाग्य निर्धारित करता है। 

आज मै आपको एक छोटी सी कहानी सुनाना चाहता हूँ। जो आपको बताएगी की हमारी मान्यता जो हम अंदर से माने बैठे है वो हमारे जीवन को किस तरह से प्रभावित करती है।

एक बार एक सेनापति अपने सैनिको को लेकर युद्ध के लिए कूच करता है रस्ते में ही सेनापति का गुप्तचर सेनापति के पास आता है। और सेनापति से कहता है। सेनापति जी हमें युद्ध नहीं लड़ना चाहिए। सेनापति गुप्तचर से पूछता है मगर क्यों।  गुप्तचर कहता है सेनापति जी हमारी सेना में कुल 1000 सैनिक है।

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परन्तु जिनसे हम युद्ध करने जा रहे है। उनकी सेना में 10,000 सैनिक है। इसलिए हमें युद्ध नहीं लड़ना चाहिए। क्योकि हमारी हार निश्चित है। सेनापति ये बात अपने सभी सैनिको को बताता है और उनसे कहता है की अब निर्णय तुम्हारा है। की तुम युद्ध लड़ना चाहते हो या नहीं। कुछ सैनिक युद्ध लड़ने के लिए तैयार हो जाते है मगर कुछ सैनिक युद्ध लड़ने से मना कर देते है।

सेनापति भी दुविधा में फस जाता है और सेनापति जी अपने सैनिको से कहता है यह निर्णय लेना बड़ा कठिन है। की हमें युद्ध लड़ना है या नहीं। इसलिए हम इस निर्णय को भगवान् पर छोड़ देते है। पास में एक मंदिर होता है सभी सैनिक सेनापति के साथ उस मंदिर में जाते है। सेनापति मंदिर के अंदर जाता है और अंदर से एक सिक्का उठाकर लाता है।

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फिर सभी सैनिको से कहता है की अब ये निर्णय हम भगवान् के हाथ में छोड़ते है। अगर चित आया तो हम युद्ध लड़ने जायेंगे और पट आया तो हम युद्ध लड़ने नहीं जायेंगे। सेनापति सिक्का उछालता है और चित आ जाता है सभी सैनिक यह देखकर खुश हो जाते है। की भगवान् उनके साथ है। सभी सैनिको के अंदर जोश भर जाता है

और सभी मिलकर सेनापति से कहते है की सेनापति जी हम सब युद्ध करने के लिए तैयार है। सेनापति जी आप जल्दी से हमें आदेश दीजिये। सेनापति जी अपनी सेना को लेकर युद्ध के लिए आगे बढ़ जाता है। बहुत ही घमासान युद्ध होता है और 1000 सैनिक 10,000 सैनिको की संख्या पर भारी पड़ते है।

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अंत में 1000 सैनिको वाली सेना जीत जाती है। और कमाल की बात ये होती है की सभी के सभी सैनिक सुरक्षित होते है। सेनापति अपनी सेना को लेकर वापिस लौटने लगता है। और रास्ते में सभी सैनिक और सेनापति धन्यवाद के लिए उस मंदिर पर जाते है। सेनापति उस सिक्के को दोबारा उठाकर लेकर आता है। और अपने सैनिको को दे देता है।

जैसे सैनिक उस सिक्के को देखते है उनके पैरो के निचे से जमीन खिसक जाती है। वो देखते है की सिक्के के दोनों पहलु एक जैसे है यानि की दोनों तरफ चित ही है पट तो उस पर है ही नहीं। सभी सैनिक सेनापति से पूछते है की आपने ऐसा क्यों किया। आपने हमें धोखे में रखा।

सेनापति उन सैनिको से कहता है की मैंने किसी को भी धोखे में नहीं रखा मैंने केवल तुम्हारी मान्यता बदली थी। क्योकि तुममे से कुछ युद्ध के लिए तैयार थे और कुछ लोग युद्ध नहीं करना चाहते थे। मैंने तो सिर्फ तुम सब की मान्यता एक जैसी कर दी और देखो परिणाम तुम सब के सामने है।

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तुम सब लोगो के भीतर ये बात बैठ गई की भगवान् तुम्हारे साथ है। इसलिए तुम्हारे हारने का तो कोई भी चांस नहीं है। यही कारण है की तुम ये युद्ध जीत पाए। परन्तु अगर तुम युद्ध को इस डर के साथ लड़ते की हम सिर्फ 1000 है और वो 10000 तो तुम उनसे कभी भी नहीं जीत पाते।

आखिर में मै आपसे कहना चाहता हूँ यदि आप जीवन बदलना चाहते है तो अपनी मान्यताओं को बदल लीजिये। आपका जीवन अपने आप ही बदल जायेगा। अगर कहानी पसंद आये तो फॉलो करना न भूले। और साथ में हमारे यूट्यूब चैनल को भी Like, Share और Subscribe करे। लिंक निचे दिया है।  धन्यवाद

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