अपने केंद्र तक कैसे पंहुचा जाये – महात्मा गौतम बुद्ध

अपने केंद्र तक कैसे पंहुचा जाये – महात्मा गौतम बुद्ध

एक बार बुद्ध के पास बुद्ध का एक भिक्षु आता है और कहता है की बुद्ध एक बहुत ही दुखद समाचार लेकर आया हूँ। बुद्ध कहते है की क्या समाचार है। वह भिक्षु बुद्ध से कहता है की आपके प्रिय भिक्षु मोकलाना अब इस दुनिया में नहीं रहें।

अपने केंद्र तक कैसे पंहुचा जाये - महात्मा गौतम बुद्ध
अपने केंद्र तक कैसे पंहुचा जाये – महात्मा गौतम बुद्ध 

उस भिक्षु की बात सुनकर बुद्ध के पास बैठे सभी भिक्षु रोने लगते है क्योकि मोगलांना एक ऐसा भिक्षु था। जिस पर बुद्ध को पूरा विश्वास था। बुद्ध ने मोगलांना को बहुत सारी ऐसी जिम्मेदारियां दी थी जो अन्य भिक्षुओ को नहीं दी जा सकती थी।

मोगलांना की मृत्यु का समाचार सुनते ही सभी भिक्षुओ के मन में पीड़ा की लहर दौड़ पड़ती है। बुद्ध के ज्यादातर भिक्षु दुःख में डूब जाते है। परन्तु बुद्ध के चेहरे पर किसी भी प्रकार का कोई भी भाव नहीं दिखता। बुद्ध का एक भिक्षु बुद्ध से पूछता है।

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बुद्ध इतना दुखद समाचार सुनने के बाद भी आपके मन को दुःख नहीं पकड़ता। बुद्ध कहते  है ऐसा नहीं है की दुःख आता नहीं है बस बात इतनी है की मैं दुःख को चुनता नहीं। बुद्ध की बात सुनकर बुद्ध का भिक्षु बुद्ध से कहता है की बुद्ध क्या दुःख का भी चुनाव किया जाता है।

दुःख तो अपने आप ही हमारे मन को जकड लेता है। बुद्ध कहते है दुःख अपने आप नहीं जकड़ता हम दुःख को चुनते है ऐसा नहीं है की मुझे मोगलां की मृत्यु की ख़ुशी है। मैं इस बात को स्वीकार चूका हूँ की मृत्यु एक सत्य है। अगर हम इस सत्य को अस्वीकार करने की कोशिश करे।

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तो शिवाय दुःख के हम अपने आप को कुछ नहीं देंगे। जिस घटना के कारण आज तुम रो रहे हो। वही घटना मेरे साथ भी घटेगी। वही घटना तुम्हारे साथ भी घटेगी। जब मृत्यु सबके लिए सत्य है तो इसके लिए रोना कैसा। वह बौद्ध भिक्षु बुद्ध से कहता है की बुद्ध आप तो परमज्ञानी है।

आपके मन को दुःख नहीं पकड़ता पर हम अपने मन को दुःख से दूर कैसे करे। बुद्ध उस भिक्षु से कहते है प्रिय भिक्षु तुम अपने मन से दुःख को तभी दूर कर पाओगे जब तुम अपने केंद्र पर पहुंच जाओगे। जहा पर पहुंचने के बाद सभी सुख दुःख छोटे हो जाते है।

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तुम इन दोनों से ही बहुत ऊपर उठ जाते हो। जब तक तुम अपने केंद्र पर नहीं पहुंचोगे तब तक तुम्हारा दुःख तुम्हे परेशान करता रहेगा और तुम्हारा सुख तुम्हारे अंदर वासनाए भरता रहेगा। वह बौद्ध भिक्षु बुद्ध से पूछता है की बुद्ध वह केंद्र कहा है।

और उस केंद्र तक कैसे पंहुचा जायेगा। बुद्ध कहते है प्रिय भिक्षु वह केंद्र तुम्हारे अंदर है। और उस तक पहुंचने का रास्ता ध्यान है। ध्यान ही एकमात्र वो रास्ता है जो तुम्हे तुम्हारे केंद्र तक पहुंचाएगा। वह बौद्ध भिक्षु बुद्ध से कहता है परन्तु बुद्ध मुझसे तो ध्यान होता ही नहीं।

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बुद्ध उस भिक्षु से कहते है ध्यान करने के लिए तुम्हे सबसे पहले अपना आचरण ठीक करना होगा। जब तुम्हारा आचरण सही होगा तो तब तुम्हारे ध्यान में उतरने सम्भावना बढ़ जाएगी। जैसे जैसे तुम लगातार ध्यान करने का प्रयास करते जाओगे वैसे वैसे तुम अपने ध्यान में बढ़ते जाओगे।

बस तुम्हे एक बात का ध्यान रखना है की तुम्हे तब तक नहीं रुकना है जब तक की तुम अपने लक्ष्य को पा ना लो। आपको कहानी कैसी लगी अपनी प्रतिक्रिया जरूर दे

फिर मिलेंगे दोस्तों एक और नई कहानी के साथ तब तक अपना ख्याल रखे और हमेशा मुस्कुराते रहिये। आज की हमारी ये कहानी कैसी लगी कमेंट बॉक्स में जरूर लिखना।

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