अगर आप समस्याओ में उलझे है तो कैसे बचे – गौतम बुद्ध

अगर आप समस्याओ में उलझे है तो कैसे बचे – गौतम बुद्ध

हम में से ज्यादातर लोग किसी ना किसी बात को लेकर दुखी रहते है। हमारे दुखी होने के पीछे बहुत सारे कारण होते है।  क्या कभी हमने ये जानने की कोशिश की है की दुःख वास्तव में है क्या अगर आप मुझसे पूछे की दुःख क्या है तो मैं कहूंगा की इस दुनिया में दुःख जैसी चीज कोई नहीं है।

अगर आप समस्याओ में उलझे है तो कैसे बचे - गौतम बुद्ध
अगर आप समस्याओ में उलझे है तो कैसे बचे – गौतम बुद्ध

पर ये बड़ा बेवकूफी भरा जवाब होगा। क्योकि अगर ये आपका अनुभव ही नहीं है तो ये शब्दों में आपको कड़वा ही लगेगा और गलत भी। मैं चाहता हूँ की जो बात मै कह रहा हूँ वो आपका अनुभव बने। दुःख जैसी कोई चीज नहीं ये मानना मुश्किल है। पर असंभव नहीं।

बात गहरी है पर अनुभव की जा सकती है। एक छोटी सी कहानी भगवान् गौतम बुद्ध के जीवन से, जो आपको बताएगी की वास्तव में दुःख क्या है। और ये किस तरह से काम करता है हमारे जीवन में।

एक बार गौतम बुद्ध और उनके कुछ शिष्य वन से गुजर रहे होते है। बहूत देर वन में चलने के बाद बुद्ध और उनके शिष्य एक विशाल वृक्ष के निचे बैठ जाते है। उस वृक्ष के निचे एक अलग सी शांति होती है। सभी लोग उस शांति को अनुभव कर रहे होते है।

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कोई भी एक शब्द नहीं बोलता चुपचाप सभी उस शांति को अनुभव कर रहे होते है। कुछ देर बीतने के बाद बुद्ध का एक शिष्य उठता है और बुद्ध से पूछता है। बुद्ध मै आपसे एक पर्सन पूछना चाहता हूँ। बुद्ध कहते है पूछो क्या प्रशन है तुम्हारा। वह बुद्ध का भिक्षु बुद्ध से पूछता है।

मैंने कभी भी आपको दुखी नहीं देखा। आपके चेहरे पे हर समय एक अलग सी मुस्कराहट होती है। जो हमें भीतर तक आनंद से भर देती है। आपके चेहरे पर अलग सी चमक है। जो हमें दुखः से कोसो दूर करती है। पर मै ये जानना चाहता हूँ।

की मेरे भिक्षु बनने से पहले मेरे जीवन में बहुत सारा दुःख था जिसके कारण मै भिक्षु भी बन गया हूँ। पर मै अभी तक ये नहीं जान पाया हूँ की दुःख आखिर है क्या। क्या आप मुझे बता सकते है की आखिर ये दुःख क्या है। बुद्ध मुस्कुराते है और अपने भिक्षु से कहते है।

दुःख एक विचार से ज्यादा और कुछ नहीं। बुद्ध के सभी शिष्य ये सुनकर चौक जाते है। और बुद्ध से पूछते है की बुद्ध विचार तो आते है और चले जाते है। पर दुःख एक बार आ जाता है तो जाने का नाम ही नहीं लेता। बुद्ध कहते है मै तुमको एक छोटी सी घटना बताता हूँ।

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एक नगर में एक धनी सेठ रहता है उसके पास एक वफादार नौकर होता है वह सेठ अपने नौकर पर बहुत विश्वास करता है। सेठ अपने नौकर पर किसी बात के लिए भी शक नहीं करता। क्योकि उसका नौकर वास्तव में ही बहुत ईमानदार होता है।

एक बार उस सेठ को किसी जरुरी काम से नगर से बाहर जाना पड़ता है। दो तीन दिन बाद वह सेठ वापिस लोटता है तो वह एक कीमती सामान लेकर आता है। वह उस सामान को कमरे में बड़ा सजाकर रखता है। और अपने नौकर से कह देता है की तुम्हे खासतौर से इस चीज का ध्यान रखना है।

ध्यान रहे की ये टूटे नहीं, यह मुझे बहुत ही लोकप्रिय है। नौकर कहता है की मालिक मै पूरा ध्यान रखूँगा। आप चिंता ना करे। अगले ही दिन वह नौकर पुरे घर की सफाई कर रहा होता है। सफाई करते करते वह सेठ की उस कीमती चीज के पास पहुँचता है। और उसकी भी सफाई करने लगता है।

सफाई करते समय वह कीमती चीज उस नौकर के हाथ से फिसल जाती है और निचे गिर जाती है। जब सेठ को ये बात पता चलती है तो वे नौकर के पास आता है। और नौकर को खूब डांटता और धमकाता है। पर वह ना ही तो अपने नौकर को नौकरी से निकाल सकता है।

और ना ही पीट सकता है। क्योकि वह उसका बहुत ही वफादार और पुराना नौकर है। इसलिए वह उसे डांट मारके ही छोड़ देता है। सेठ अपनी उस कीमती चीज के बारे में सोच सोच कर बहुत दुखी रहता है। रात होती है और सेठ अपने कमरे में लेट जाता है।

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सेठ को नींद नहीं आ रही होती है वह बहुत ही बेचैन हो जाता है। बेचैनी के कारन सेठ अपने कमरे से बाहर निकलता है। और देखता है की उसका नौकर निश्चित होकर सो रहा है। वह ये देखकर और क्रोधित हो जाता है। और सोचता है की इसने मेरी इतनी कीमती चीज तोड़ दी और इसको थोड़ी सी भी चिंता नहीं है।

मुझे यहाँ नींद भी नहीं आ रही है और ये आराम से सो रहां है। पर सेठ कुछ कर नहीं पाता क्योकि सेठ को पता है की नौकर बहुत ही वफादार है। सेठ अपने कमरे में वापिस चला जाता है। अगले दिन सुबह सेठ सोचता है की मै इस समस्या से कैसे निकलूं।

फिर उसे एक तरकीब समझ में आती है। अपने नौकर के पास जाता है और अपने नौकर को कहता है की मुझे बहुत दुःख हो रह है ये बताते हुए की वो जो कीमती चीज तुमने कल तोड़ी थी। वह मै तुम्हारे लिए लाया था। मै चाहता था की मै उसे तुम्हे उपहार में दूँ।

परन्तु अब क्या कर सकते है अब तो वह टूट गई है। सेठ की बात सुनकर नौकर को झटका लगता है। नौकर सोचता है अरे ये तो बहुत बड़ी गलती हो गई। वह इतनी कीमती और सूंदर चीज मेरे लिए ही थी जो मुझसे ही टूट गई। फिर क्या था उस नौकर के मन में बेचैनी पैदा हो जाती है।

आपका विश्वास ही आपका भाग्य निर्धारित करता है।

दुःख पैदा हो जाता है फिर रात होती है और अब सेठ आराम से सोता है। लेकिन वह नौकर बेचैन रहता है। उसको नींद नहीं आती। क्यों नींद नहीं आती। क्योकि अब उस नौकर ने सेठ की उस कीमती चीज को अपने साथ जोड़ लिया है।

इसलिए वह दुखी हो रहा है पहले उस नौकर के मन में यह विचार नहीं था की ये कीमती चीज मेरी है। पर अब उसके मन में ये विचार है की अगर वह कीमती चीज ना टूटती तो वह मेरी होती। बुद्ध कहते है की दुःख केवल एक विचार है। और ये विचार कैसे उत्पन हुआ अपने आपको किसी चीज से जोड़ने से।

हम जिस भी चीज को अपने आप से जोड़ लेते है। उसे पकड़ने की कोशिश करते है वो चीज हमें दुःख देती है। क्योकि वास्तविकता तो यही है की कोई भी चीज हमसे जुड़ नहीं सकती। अब बहुत सारे लोग यह पूछ सकते है। की हम अपनी चीज को अपना ना माने।

मै ये नहीं कह रह मै तो ये कहना चाहता हूँ की इतना समझे की हर चीज आपके पास है। आपकी है पर कुछ समय के लिए, कुछ समय के बाद वह आपसे दूर हो जाएगी। उसे दूर होने की घटना को स्वीकारें और आगे बढे।

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