अगर आपका जीवन समस्याओ से भरा है तो खुश हो जाईए – गौतम बुद्ध

अगर आपका जीवन समस्याओ से भरा है तो खुश हो जाईए – गौतम बुद्ध

अगर आपके जीवन में बहुत सारी समस्याएं है बहुत सारे दुःख है तो घबराइए मत खुश हो जाइये क्योकि आपका जीवन बदलने वाला है। मै आपको एक छोटी सी कहानी आपको बताने वाला हूँ अपनी इस बात को समझाने के लिए।

अगर आपका जीवन समस्याओ से भरा है तो खुश हो जाईए - गौतम बुद्ध
अगर आपका जीवन समस्याओ से भरा है तो खुश हो जाईए – गौतम बुद्ध 

एक बार एक किसान अपने खेत में बैठा हुआ भगवान् को गालिया दे रहा होता है। भगवान् उसकी गालिया सुनते सुनते बहुत परेशान हो जाते है। और उसके पास आकर उससे पूछते है की क्या हुआ भाई तुम मुझे इतनी गालिया क्यों दे रहें हो।

वह किसान कहता है की मुझे नहीं पता की आपको भगवान् किसने बनना दिया। आपको कोई भी कार्य करना सही से आता ही नहीं है। न तो आप समय पर बारिस करते है न ही समय पर धुप देते है। और न ही हवाएँ चलाते है। आपकी वजह से हमें बहुत कम पैदावार प्राप्त होती है।

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आप कैसे भगवान् है। उनकी बात सुनकर भगवान् उस किसान से कहते है की मै सभी कार्य सही तरिकके से करता हूँ मगर तुम उन्हें गलत क्यों बता रहे हो। वो किसान उस भगवान् से कहता है की अगर आप अपना कार्य सही से करते है तो हमें इतनी कम पैदावार क्यों होती है।

हम प्रयास तो ज्यादा करते है मगर हमें उसका फल कम क्यों मिलता है। भगवान् उस किसान से कहते है की तुम जितना प्रयास करैत हो तुम्हे उतना ही फल मिलता है। मै कभी भी किसी को उसकी मेहनत से कम फल नहीं देता। वह किसान भगवान् से कहता है।

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बस अब बहुत हुआ आप ये कार्य मेरे हाथों में सौंफ दीजिये। क्योकि आप नहीं जानते की किस समय वर्षा करनी है किस समय हवाओं को चलाना है और किस समय धुप देनी है। आप सारी ही चीज़े गलत समय पर करते है। कृपा करके इस जिम्मेदारी को मुझे सोप दीजिये।

किसान की बात सुनकर भगवान् मुस्कुराते है और कहते है मैं तुम्हारी बात मान लेता हूँ। भगवान् पूरी जिम्मेदारी किसान के हाथ में सोप कर चले जाते है। किसान अपनी मर्ज़ी से हवाएं चलाता है, किसान अपनी मर्ज़ी से फसलों को धुप देता है। और सही मात्रा में वर्षा भी करता है।

कुछ समय में फसलें खेतो में लहराने लगती है। किसान खुश होता है और मन ही मन सोचता है की अच्छा हुआ भगवान् से मैंने ये कार्य ले लिया। क्योकि भगवान् से तो ये ठीक से हो ही नहीं पा रहा था।  कुछ दिनों बाद फसल काटने का समय आता है।

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फसल काटने के बाद किसान गेहूं की पहली बाली खोलकर देखता है। उसमे कुछ नहीं होता। फिर वह दूसरी बाली को खोलकर देखता है उसमे भी कुछ नहीं होता। वो किसान धीरे धीरे 8 से 10 बालियों को खोलकर देखता है। लेकिन सभी की सभी बाली खाली ही मिलती है।

ये देखकर किसान के पैरों के निचे से जमीन खिसक जाती है। और फिर वो चिल्लाता है भगवान् तुमने मेरे साथ ये क्या किया। मैंने सबकुछ समय पर किया था फसल भी हरी भरी थी। परन्तु गेहूं की हर बाली तो खाली है। किसान की बात सुनकर भगवान् फिर से उसके पास आते है।

और कहते है अब क्या समस्या हुई। किसान भगवान् से कहता है की आपने मेरे साथ धोखा किया है। मैंने अपनी फसलों को सारी सुविधाए दी फिर भी उनके अंदर फल विकसित नहीं हो सका ऐसा क्यों। भगवान् उसकी बात सुनकर उसको कहते है।

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फल का विकास सुविधाओं से नहीं होता, फल का विकास समस्याओ से होता है। तुमने समय पर बारिस की, समय पर हवाएं चलाई, समय पर धुप दी परन्तु तुमने एक बात को नजरअंदाज किया। की जब तक फसलों पर समस्या नहीं आएगी। तब तक वो विकास नहीं कर सकती।

भगवान् उस किसान से कहता है की मैं तेज हवाएं चलाता था ताकि फैसले अपनी जड़ को धरती के अंदर और मजबूत कर सके। मै समय पर बारिस नहीं करता था ताकि फसलों की जड़े पानी की तलाश में और गहरी जा सके। मैं सभी चीज़े उस मात्रा में करता था जिससे फसलों को संघर्ष करना पड़े।

मगर तुमने ऐसा नहीं किया । क्योकि तुमने अपनी फसलों को सुख सुविधाय दी जिससे उनका शरीर तो बड़ा हो गया लेकिन अंदर से उनका विकास ना हो सका। आप जितने भी लोग हमें देख रहे है वो मुझे एक उदाहरण ऐसा दे दीजिये जिसके जीवन में आज तक कोई समस्या ना आई हो।

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जिसके जीवन में परेशानिया ना आई हो। और वह एक सक्सेसफुल इंसान बना हो। आप नहीं दे सकते। क्योकि सक्सेस सुविधाओं से नहीं समस्याओ से मिलती है। मै आपसे कहना चाहता हूँ कहानी काल्पनिक है परन्तु सचाई को दर्शाती है।

इस स्थिति में आपके पास दो विकल्प होते है। या तो आप स्थिति को स्वीकार करे, अपने आप को जिम्मेदार माने और आगे बढे या फिर हारकर बैठ जाए। और औरो को कोसते रहे अपने जीवन की उस स्थिति को कोसते रहे। दोनों ही विकल्प आपके हाथ में है।

एक आपको विकास की और ले जाता है और दूसरा आपको आपकी ही नजरो में गिरा देता है। अब ये आपका निर्णय है की आपको कोनसा विक्लप चुनना है। क्योकि समस्याए आपके और सफलता के बीच में बाधा नहीं है सीढिया है।

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